Komodo dragon in hindi, दुनिया की सबसे बड़ी छिपकली कोमोडो ड्रेगन


Komodo dragon


- इसे कोमोडो मॉनिटर के नाम से भी जाना जाता है. यह छिपकली की प्रजाति है जो इंडोनेशिया के कोमोडो आईलैंड, रिंका, फ्लोरेंस, वीकली मस्टैंग, नामक द्वीप पर रहते हैं. यह बगुनी डायनामत रिजल्ट की परिवार से है. ये आकार में छिपकलियों की प्रजाति में सबसे बड़े होते हैं. यह लंबाई में 3 मीटर तक बड़ सकता है व इनका  का वजन 70 किलो तक होता है. इनके बड़े आकार को ही द्वीप की विशालता का कारण माना जाता है क्योंकि कोई और मांसाहारी जानवर इनके सिवा उस द्विप पर नहीं रहता!
वर्तमान की शोध बताते हैं कोमोडो ड्रैगन का बड़ा आकार पर छिपकली के प्रतिनिधि के रूप में माना जाता है जो कभी इंडोनेशिया व ऑस्ट्रेलिया में रहा करते थे. ज्यादातर वह अन्य मेगाफोना के साथ मानव क्रिया के द्वारा मारे गए थे. उनके अवशेष v. Komodian से बहुत मिलते-जुलते हैं. यह 3.8 साल पहले ऑस्ट्रेलिया में मिले थे और इनका आकार flores द्विप पर 900000 सालों से एक जैसा बना हुआ है. इनके आकार की वजह से यह परिस्थतिय प्रणाली को प्रभावित करते हैं कोमोडो ड्रैगन घात लगाकर शिकार करते हैं यह अकशेरुकी चिड़िया व अन्य स्तनधारियों जीवों का शिकार करते हैं यह दावा किया गया है कि इनके पास एक जहरीले दांत होते हैं इनके निचले जबड़े में दो ग्रंथियां होती हैं जो जहर के कई जहरीले प्रोटीन को छुपाती हैं इनका जैविक महत्व विवादित है!

सरीसृप की दुनिया में कोमोडो ड्रैगन के समूह असाधारण शिकारियों को में आते हैं. एक बड़ा कोमोडो ड्रैगन एक timor हिरण को खाता. वह सड़ा हुआ खाना कमी खाते हैं वह इंसानों पर कभी-कभी ही हमला करते हैं!

प्रजनन मई से अगस्त के महीने में चालू होता है. वह अंडे सितंबर में देते हैं यह 20 अंडे एक बार में देते हैं. 1 मेगापोड  हौसला य  अपने खुद के खोदे हुए गड्ढे में अंडे देते हैं 7 से 8 महीने तक अपने अंडों की देखभाल करते हैं. अप्रैल में अंडे फूट जाते हैं छोटे komodo ड्रैगंस पेड़ों के नीचे छुप जाते हैं. अपना बचाव करते हैं मांस भक्षी जानवरों से बचने के लिए यह छुप जाते हैं. 8 से 9 साल के बीच यह जवान हो जाते हैं. वहीं इनकी औसतन आयु 30 साल होती है इनको सबसे पहले पश्चिमी विशेषज्ञों द्वारा 1910 में देखा गया था. इनके बड़े आकार में शरीर मानव गतिविधियों की वजह से इनकी कानून के द्वारा राष्ट्रीय उद्यान का गठन 1980 में हुआ!



राज्य       -  animalia
संघ        -  chordata
कक्षा       -  reptilia
गण        -  squamata
परिवार     -  varanidae
जाति       -  varanus
उपजाति    -  varanus
द्विपद नाम  -  v. Komodoensis

वर्गीकरण इतिहास -


इनको सबसे पहले 1910 में यूरोपियों द्वारा देखा गया. जब जमीनी मगरमच्छ की खबरें न्यूटन पेन स्टैंड तक पहुंची और  1912 में बहुत बदनामी हुई. जब जैविक संग्रहालय की निदेशक पीटर ओवेंस ने अखबार में खबर छापी जब लिटिन एंड से उसकी फोटो व खाल मिली और इकट्ठा करने वाले से दो और नमूने मिले पहले दो जिंदा कमोडो ड्रैगन जो यूरोप में reptile हाउस  में लंदन चिड़ियाघर में रखा गया. जब ये 1927 में आए थे तब Joan viyuchamp नाम के एक निरीक्षक ने कैद में पड़े इन जानवरों पर टिप्पणी लिखें और जैविक समिति लंदन में प्रदर्शित किया. 1928 में कोमोडो ड्रैगन एक अभियान के लिए जो कोमोडो आइलैंड पर चलाया गया 1926 में doglus bardan वर्णन के द्वारा 12 संरक्षित नमूने व दो जिंदा komodo ड्रैगन के साथ  इस अभियान से बनी फिल्म किंग कॉन्ग के प्रेरणा का स्रोत बना जिन्होंने इसे komodo ड्रैगन नाम दिया था. इसके तीन नमूने अमेरिका के प्राकृतिक संग्रहालय में रखे हुए हैं. डच लोगों को इनके सीमित संख्या का अनुभव होने लगा था इसके बारे में पता चलने पर उन्होंने शिकार पर प्रतिबंध लगा दिया गया वर्ल्ड वॉर टू के कारण 1950 से 1960 तक नहीं चला जब अध्ययन में इसके खाने व्यवहार, प्रजनन, शरीर के तापमान के बारे में अध्ययन किया इस बार एक नए कोमोडो ड्रैगन के अध्ययन का अभियान auffen berg फैमिली को दिया गया जो कोमोडो आइलैंड पर 11 महीने रुकी 1959 में इसके दौरान वॉल्टर auffen berg और उनकी सहायक पुत्रा शस्त्रावन ने 50 से ज्यादा कोमोडो ड्रैगन को पकड़ा auffen berg के अभियान के द्वारा प्राप्त अनुसंधान अत्यंत प्रभावशाली हुआ और कमांडो को पकड़ने में इस अभियान के बाद कोमोडो ड्रैगन की व्यवहार पर प्रकाश डाला. जीव वैज्ञानिक claudio ciofi ने इसकी अध्ययन को जारी रखा!

हिंदी में विवरण -


एक कोमोडो ड्रैगन का वजन 70 किलो तक होता है. और औसतन वयस्क का वजन 80 से 90 किलो तक होता है. इसकी लंबाई 2. 5 9 मीटर होती है व मादा कोमोडो का वजन 70 से 72 किलो तक होता है. इसकी लंबाई 2.29 मीटर होती है इसमें अब तक का सबसे भारी 166 किलो वजनी में 10 फीट लंबा देखा गया है. इसकी पूछ इसके शरीर के हिसाब से लंबी होती है जिसको 60 बार हटा दिया जाता है. इनके दानेदार दांत होते हैं इनकी लंबाई लगभग 1 इंच तक होती है. इसकी लार में खून अक्सर पाया जाता है क्योंकि इसके दांत मसूड़ों के ऊतक से ढके हुए होते हैं इसे खाते वक्त लुंज हो जाते हैं. इसके पास लंबी पीली कांटेदार जीभ होती है. इसकी चमड़ी सख्त होती है इसमें छोटी हड्डियां होती हैं. इनको ओस्टियोडर्मस कहते हैं! 


यह श्रंखला के रूप में व्यवस्थित रहती हैं यह उम्र के साथ संख्या और लंबाई में बढ़ती रहती हैं. यह ओस्टियोडर्मस हड्डियां नवजात व किशोरों में नहीं पाई जाती इनके प्राकृतिक कवच उम्र व आवश्यकता के मुताबिक और बेहतर होता जाता है जब ये खाने के लिए एक दूसरे से लड़ते रहते हैं व जब खुद को बचाने का प्रयास करते हैं!

यह हवा को महसूस करने के लिए अपनी जीभ का उपयोग करते हैं इसके पास केवल एक ही कान की हड्डी होती है जो कंपन को (the stapes) typmanic मेंब्रेन से cochlea तक पहुंचाता है यह 400 से 20000 हर्टज की ध्वनि सुन सकते हैं. जबकि मनुष्य केवल 20 से 20000 वर्ष की ध्वनि सुनता है. यह किसी वस्तु को 300 मीटर दूर से भी देख सकते हैं. पर यह रात में अच्छा देखने में सक्षम नहीं होते और रंगों में पहचान कर लेते हैं. पर अच्छी तरीके से नहीं और औरों की तरह वस्तु को पहचानने के लिए अपनी जीभ का इस्तेमाल करते हैं! 

यह अपनी गर्दन को एक दिशा से दूसरी दिशा की ओर हिलाते हुए चलते हैं. इससे यह 5 से 9 किलोमीटर दूर से भी सड़ा हुआ खाना ढूंढ लेते हैं. इसके गले के नीचे बस कुछ ही स्वाद कलिका होती हैं यह जिनकी हड्डियां मजबूत होती हैं. इनके पास संवेदी टुकड़े होते हैं जो नर्वस सिस्टम से कनेक्ट रहते हैं जो इनको वस्तुओं महसूस करने में मदद करते हैं यह पैमाने कान, थोड़ी, पैरों के पंजे तीन व उस ज्यादा संवेदी अंग होते हैं!


व्यवहार -


ये गर्म व सूखे जगह पर रहते हैं. ज्यादातर सूखी जगह पर ही रहते हैं ओपन ग्रास, सवाना, वर्षावन जैसे ब्रह्माउष्मीय स्थानों पर यह अधिकतर रहते हैं. यह दिन के समय ज्यादा  सतर्क रहते हैं हालांकि यह रात्रि गतिविधियों को प्रदर्शित करता है कोमोडो अकेला ही रहते हैं. यह साथ केवल खाने व प्रजनन के लिए आते हैं. यह 20 किलोमीटर की रफ्तार से भागने में सक्षम होते हैं और 15 फीट तक तैर सकते हैं. अपने मजबूत पंजों की सहायता से पेड़ों पर भी अपने शिकार को पकड़ने के लिए चड सकते है.  यह अपने परिपक्व पंजों का इस्तेमाल हथियार के तौर पर करते हैं. यह रहने के लिए अपने हाथों में मजबूत पंजों के उपयोग से गहरे गड्ढे होते हैं यह गड्ढा एक से 3 मीटर तक होता है. इसके आकार ब सोने की आदत की वजह से. यह अपने शरीर का तापमान रात में दिन के हिसाब से संतुलित कर लेते हैं. यह दिन के समय शिकार पर निकलते हैं. पर ज्यादा गर्मी वाले दिन ये शिकार नहीं निकलती. यह रहने के लिए पेड़ों के आसपास अपना बसेरा डालते हैं. वह ऐसी जगहों पर अपना घोंसला या गड्ढा खोदते हैं. जहां पर इनको आसानी से हिरणों को ढूंढने में आसानी हो!


आहार -


कोमोडो ड्रैगन एक मांसाहारी होते हैं. हालांकि वह हमेशा सड़ा हुआ ही खाते हैं. यह अपने शिकार पर बार-बार हाथ लगाते हैं. जैसे ही कोई शिकार इनके खास स्थल तक आता है. यह अपनी पूरी ताकत व रफ्तार से उस पर हमला कर देते हैं. और अपने गले से दवा लेते हैं यह ज्यादा घायल सरकार को अपने हाथ से जाने नहीं देते और उसे नुकसान पहुंचाकर में खून की कमी के कारण मारने का प्रयास करते हैं. इनको जंगली सूअरों को कुछ पल में मारते हुए देखा गया है यह घायल सूअर व हिरण को मारने के लिए अपने मजबूत नाखूनों का उपयोग करते हैं. यह जानवरों के शवों को 9 किलोमीटर दूर से ढूंढने में भी सक्षम होते हैं. यह अपने शिकार को फाड़ कर खाते हैं वे छोटे शिकार जैसे बकरी का बच्चा कुछ सबूत निकल जाता है. इसका चेतन मुखर झगड़ा और लचीली खोपड़ी में बड़ा पेड़ शिकार को साबुत निकलने में मदद करता है. यह अपने खाने को चिकना बनाने के लिए अपनी लाल लाल का प्रयोग करते हैं पर निकलने में 15 से 20 मिनट तक का समय लगता है!



इसकी जीत के अंदर एक पतली नली होती है. जो फेफड़ों से जुड़ी होती है. जो निकलते समय उनको सांस लेने में मदद करती है. ऐसी पर्सेंट खाना खाने के बाद अपने आप को धूप में ले जाते हैं. इससे खाना पचने की प्रक्रिया जल्दी-जल्दी होने लगती है. अगर खाना सड़ा हो तो पचने में समय लगता है. उसके दी में पासिंग के लिए कारण एक बड़े ड्रैगन साल में 12 शिकार से ही जिंदा रहते हैं. खाना पचने के बाद यह दांत बालों को बाहर निकाल देते हैं. जो बदबूदार बलगम की तरह होता है. खाना पकने के बाद अपने मुंह को धूल में रखते हैं. बलगम को हटाने के लिए यह खुद की खुशबू को पहचान नहीं पाते सबसे बड़ा कोमोरो पहले खाता है. और छोटा अपनी बारी का इंतजार करता है. अपने शरीर से बड़े और छोटे कोमोडो अपने प्रभाव को दर्शाते हैं. जो बड़े को आपस में लड़ते हैं जो हारता है उसे पीछे हटना पड़ता है. जो जीतेगा वह पहले खाएगा कॉमेडी छोटे कचोरी की अन्य सही सर अब चिड़िया बंदर बकरी हिरण घोड़े पानी की भैंस को खाते हैं. मैं युवा कोमोडो अन्य छिपकली तीनों के अंडे छोटे स्तनधारियों को खाते हैं. इंसानों पर कम ही हमला करते हैं पर कभी उनकी कब्रों को पहुंचकर उनको खा जाते हैं. इनकी इस आदत की वजह से वहां रहने वाले लोगों को कब्रिस्तान को किसी अन्य जगह पर लगाना पड़ता है. यहां पर यह नहीं जा पाते यह स्टीगाडोन हाथी को खाने को विकसित हुए थे जो कि फ्लोर्स में रहता था!


प्रजनन-


संगम मई से अगस्त के बीच होता है. सितंबर महीने में देते हैं इस समय यह आपस में लड़ते हैं. वे जीतने पर एक दूसरे से जूझने पर अपने पिछले पैरों से पकड़ लेते हैं. वह हारने वाला जमीन में गिर जाता है. यह लड़ाई की तैयारी से पहले उल्टी करते हैं. 


मैं जीतने वाला मादा को जीभ से चाट कर बातचीत बढ़ाता है. यह मादा प्रेमालाप से पहले अपने पंजों का दांतो से विरोध करते हैं वह नर मादा को कैसे अपने बस में कर देता है अपनी थोड़ी को मादा की पीठ पर घिसता है. नर संभोग के लिए अपना आधा लिंग मादा को देता है. कोमोडो ड्रैगन पत्निक व प्रपत्र जोड़ी के  रूप में है यह छिपकलियों की सबसे दुर्लभ विशेषताएं है  मादा कोमोडो अपने अंडे अगस्त से सितंबर में देती है कई तरीके के इलाकों में अपने अंडे रखते हैं. अंडे मेघापोड में रहते हैं. इस धरती पर 20 परसेंट पहाड़ी इलाकों में देते हैं अपनों को बचाने के लिए अनेक शब्द गड्ढे में पढ़ाती है कि अभी के समय अधिकतर 20 अंडे देती है इनको 7 से 8 महीने की अवधि के लिए सेना पड़ता है. से बाहर आना नवजात बच्चों के लिए काफी मेहनत बड़ा काम होता है. यह अपने दांतो से अपने अंडों के परत को तोड़ते हैं बाहर आ जाते हैं. बाहर निकलने के वक्त से यह बहुत कमजोर होते हैं. जिससे इनको अन्य मांसाहारी जानवरों द्वारा खाए जाने का खतरा बना रहता है. यह अपने शुरुआती कुछ साल पेड़ों में ही बताते हैं. जहां शिकारियों से सुरक्षित रहते हैं मध्य शिकार बहुत ही कम देखने मिलता है. 9 साल में यह जवान हो जाते हैं मैं 30 साल इनकी अधिकतम आयु होती है!

क्या कुत्ते साँपों को सूँघ सकते हैं? Can dogs smell snakes in hindi information

क्या कुत्ते साँपों को सूँघ सकते हैं? Can dogs smell snakes in hindi information


हाँ कुत्ते साँपों को सूँघ सकते है. कुत्ते बहुत ही आसानी से चीजों को सूँघ सकते हैं. यह जमीन में रहने वाली कीड़ों व बिलों में रहने वाले चूहों व अन्य भूमिगत जीवों को भी आसानी से सूँघ लेते है. यही कारण है कि अधिकतर किस्से कुत्ते के चेहरे व नाक पर सांप के द्वारा काटने के होते हैं. इनकी सुनने की क्षमता बहुत ही कमाल की होती है. इनका दिमाग मानव दिमाग से बड़ा होता है. व सुनने की छमता मानव से 14% ज्यादा होती है. यह अपने आसपास के वातावरण को जानने में जिज्ञासु रहते हैं. कुत्ते आसपास की नई व पुरानी सुगंध व दुर्गंध को याद रखने में बहुत ही ज्यादा सक्षम होते हैं. क्योंकि सांप हाइबरनेटिंग के लिए भूमि के अंदर चले जाते हैं. तो यह बसंत व गर्मी के महीनों में अधिक देखने के आसार होते हैं. कुछ सांप अपनी उपस्थिति का इशारा करते हैं पर कुत्ते जिज्ञासा के कारण सावधान नहीं होता. सांप चलते वक्त गंदी दुर्गंध को साथ छोड़ जाते हैं. वह अजीबोगरीब आवाज निकालने के साथ-साथ सांप वह अपनी पूंछ में से खराब हवा को निकालते हैं. वह कुत्ते जीवों की दुर्गंध से जल्दी आकर्षित जल्दी होते हैं.  कुत्तों की कुछ प्रजाति ऐसी भी होती है. जो चीजों को अच्छे तरीके से महसूस कर सकते हैं. इसलिए कुत्ते उसके प्रति प्रतिक्रिया करते हैं. और सांप द्वारा काटे जाने के किस्से देखने में आते हैं! 

एशियन कोयल की जानकारी हिन्दी में , indian and Australian cuckoo in hindi

एशियाई कोयल 


एशियाई कोयल इसका द्विपद नाम (eudynamys scolopaceus) है यह को कॉलीफॉर्म्स के गण से है यह दक्षिण पूर्व एशिया चाइना पर भारत के उपमहाद्वीप में पाया जाता है यह ब्लैक बिल व प्रशांति कोयल के साथ उप प्रजाति दर्शाता है| यह पक्षी कभी भी अपने अंडों के लिए हौसला नहीं बनाता ये अपने अंडे अन्य पक्षियों के घोंसले में रख देता है| ज्यादातर एक कौवा के अंडे को नीचे गिरा कर अपने अंडे उसके घोंसले में रख देता है |यह शर्मिला व अकेला रहने वाला पक्षी है |एशियाई कोयल ज्यादातर फल बक्षी होते हैं कोयल भारत में कई जगह कविताओं का  प्रतीक माना जाता है!



मादा (female) कोयल
नर (male) कोयल

जगत - animalia
संघ   - chordata
वर्ग   - aves
गण.  -  cuculiformes
कुल  -  cuculidae
वंश   -  eudynamys
जाति  - eudynamys scolopaceus

हिंदी में विवरण


एशियाई कोयल लंबी पूंछ वाला पक्षी है |इसकी लंबाई 40 से 45 सेंटीमीटर वह 16 से 18 इंच तक होती है |व भजन 195 से 330 ग्राम तक होता है| नर एशियाई कोयल नीला व काले रंग का होता है| इसकी चोंच हल्की भूरी होती है |इसकी आंख की पुतली गहरी लाल होती है वह भूरे पैर व पंजे होते हैं |और मादा कोयल इसका माथा भूरा होता है वह सिर पर धारियां होती हैं| इसकी पीठ, दुम व पंख कवच गहरे भूरे होते हैं| सफेद धब्बों के साथ अंदरूनी हिस्से सफेद ज्यादा धारीदार होते हैं इनके अन्य उपजाति है वाले पक्षियों में रंग व आकार अलग-अलग होता है वयस्क पक्षियों की ऊपरी जताई नर की तरह वह चीज काली होती है यह बहुत यह प्रजनन के महीनों के समय ज्यादा स्वर निकालते हैं मार्च से अगस्त कोष्टक बंद एक जैसी आवाज के साथ आवास करते हैं नर्क अपरिचित गांव कू कू कू वह मारा कि कि कि स्वर्ण कांति है परजीवी कोयल ओं से यह पक्षी अलग होते हैं

एशियाई कोयल की आदतें पर बसेरा 


यह पेड़ पौधों पर खेती वाले इलाकों में अधिक पाए जाने पाए जाते हैं एशियाई कोयल प्रजनन के लिए भारत से दक्षिण एशिया के उष्णकटिबंधीय जंगलों में बांग्लादेश और श्रीलंका से चाइना में महान संडास चाहते हैं नए क्षेत्रों में जल्दी ही अपना आवाज बना लेते हैं यह सबसे पहले सिंगापुर में 1980 में आए वह आते ही यह आम पक्षी की तरह सभी जगह फैल गए

वर्गीकरण 

इस प्रजाति की कई विविधता द्विप आबादी व विस्तृत श्रृंखला के साथ वर्गीकृत किए हैं पहला समावेशी का ब्लैक बिल्ड व दूसरा  प्रशांत कोयल जो ऑस्ट्रेलिया में रहती है और इन दोनों प्रजातियों को आम कोयला के रूप में भी माना जाता है इनके चौच का रंग व आवाज़ इन के पंखों का अलग होना इन तीनों एक उप प्रजाति के रूप में प्रदर्शित करता है इसमें वैकल्पिक रूप से सुलावेसी की काली चोंच को ही ओ उप प्रजाति के रूप में माना जाता है यह प्रशांत कोयल की श्रेणी है जो ऑस्ट्रेलिया में प्रजनन करते हैं. उनको ऑस्ट्रेलियन कोयल कहते हैं! 

Nasa के curiosity rover ने ली मंगल सतह की सबसे अच्छी पैनारोमा तस्वीर

Nasa के curiosity rover ने ली मंगल सतह की सबसे अच्छी पैनारोमा तस्वीर


 क्यूरियस रोवर ने मंगल की सतह की अब तक की सबसे अच्छी पैनारोमा ली. यह 1.8 billion पिक्सेल की पैनारोमा है. 2019 में 1000 से ज्यादा तस्वीरें ली गई थी. वह आने वाले महीनों में और भी ली गई!
Credits: NASA/JPL-Caltech/MSSS


इसमें मंगल की सतह को 1.8 बिलियन पिक्सेल का दृश्य था. रोवर के मोस्ट कैमरा या mostcam ने अपनी  टेलीकॉम लेंस का उपयोग करके इस पैनारोमा को कैद किया तथा  कम resolution का फोटो के लिए अपने मध्यम लेंस का उपयोग किया. इसमें 650 मिलियन पिक्सेल है. जिसमें रोवरको ट्रैक वे रोबोटिक arms शामिल है!

Credits: NASA/JPL-Caltech/MSSS


पूरी तस्वीर देखने के लिए
https://photojournal.jpl.nasa.gov/catalog/PIA23623


1.8 बिलियन पिक्सेल वाला पैनारोमा चौकी रोवरको शामिल नहीं करता है परंतु नासा की curiosity रोवर ने 650 million पिक्सेल पैनारोमा को रोवर की खुद को शामिल किया!

2013 में curiosity ने 1.3 बिलियन पिक्सेल का पैनारोमा लिया था. अपने मास्टर्कैम कैमरे की मदद से  अपने काले और सफेद नेविगेशन कैमरे or navcam के साथ रोवर ने इस इमेज को लिया था. इमेजिंग विशेषज्ञ सावधानी से मंगल के पैनारोमा के  सभी चित्रों को देखकर वह किनारों को ध्यान में रखकर एक अच्छा दृश्य पहली बार लिया और ऐसा पहली बार हुआ कि जब 360 डिग्री पैनोरमा अपने ऑपरेशन को दिया है!

Credits: NASA/JPL-Caltech/MSSS

इसमें 4 दिनों में साडे 6 घंटे तस्वीरों को लेने में लगे मास्टर्कैम ऑपरेटर्स ने एक जटिल लिस्ट बनाई. इसमें रोवर के मस्तूल को ध्यान में रखकर मैं यह ध्यान में रखा कि पैनोरमा के चित्र सही से आएं. चित्रों के लिए जितना प्रकाश चाहिए. उतना प्रकाश मिले इसलिए इस ऑपरेशन को 2:00 pm ya दोपहर को किया गया था. मंगल के समय के हिसाब से! 

(Betelgeuse) आर्द्रा तारा की चमक हो रही है कम, Betelgeuse है खत्म होने की कगार पर

(Betelgeuse) आर्द्रा तारा की चमक हो रही है कम 
Vlt से पता चला 


रात के आसमान में आर्द्रा तारा दसवां सबसे चमकदार तारा है. और ओरियन के नक्षत्र में rigel के बाद दूसरा सबसे चमकदार तारा है. लाल रंग का अर्ध गोलाकार तारा जोकि (eso) दक्षिणी यूरोप वेधशाला के द्वारा देखा गया आर्द्रा तारा की  चमक में कमी आई. यह नक्षत्र का एक बहुत ही बड़ा लाल चमकदार तारा है इसकी चमक जनवरी 2019 से दिसंबर 2019 में कम हो गई इसकी चमक के साथ इसके आकार में भी बहुत परिवर्तन देखा गया.

हम लोग आप अपना पूरा जीवन आसमान में चमकदार आर्द्रा तारा को अपनी नंगी आंखों से एक चमकदार तारे के रूप में देखते हैं अचानक से उसका चमकना कम होने लगा है उसकी चमक उसकी असल चमक की 36 % कम हो गई है हम नग्न आंखों से भी यह बदलाव देख सकते हैं. एक खगोलिय सिद्धांत है कि 1 दिन ये आर्द्रा तारा खत्म हो जाएगा!



14 फरवरी 2020  इसकी पुरानी व नई तस्वीर जारी की गई जिसमें इसकी चमक के साथ-साथ इसके आकार के बदलाव को भी देखा जा सकता है. यह सोने इसे (vlt) very large telescope की सहायता से देखा जो कि chile में है.


अगर हम तस्वीर के दिसंबर महीने में चौका देने वाला परिणाम हमारे सामने आया बीटल किसकी एक चौका देने वाली तस्वीर सामने आई जो यह सो नाइस में होने वाले बदलावों को दिखा रही थी तस्वीर में इसकी पहली और बाद की तस्वीर है. यह तस्वीर बताती है कि कितनी मात्रा में इसकी चमक कम हो चुकी है vlt की मदद से एक तस्वीर जनवरी में दूसरी तस्वीर दिसंबर महीने में ली गई दिखाई दिया. इसमें देखा कि ये कितना पतला हो गया है एक  लाल महादानव तारा आर्द्रा तारा इसके बारे में खगोलिय सिद्धांत है कि 1 दिन खत्म हो जाएगा. पर eso ने कहा कि यह अभी नहीं होने वाला!

इसके अध्ययन के लिए भी एलटी की आवश्यकता होगी धूल की किरणों से उत्सर्जित होती अवरक्त किरणें इस तस्वीर में दिखाई दे रही है. यह धूल के बादल जो इस तस्वीर में है. यह उस समय दिखाई देते हैं. जब वह तारा अपना मलवा अंतरिक्ष में छोड़ने लगता है. यह धूल का  हिस्सा जोकि इसे पूरी तरीके से ढक लेता है. और जो लाल बिंदु तस्वीर में है. आर्द्रा तारा है जिसका आकार ब्रहस्पति की कक्षा के बराबर है! 

Golden Pheasant (सुनहरा तितर) in hindi, सुनहरा तितर की जानकारी हिन्दी में

(golden Pheasant) सुनहरा तीतर - 


यह अपने सुनहरे रंग और अद्भुत आकर्षक शरीर के लिए जाना जाता है. सुनहरा तितर चाइना के मध्य प्रांत हेनान (henan) के ठंडे बर्फीले इलाकों में पाया जाता है. इसे अकेला रहने वाला पक्षी है इसलिए यह जंगलों में ही पाया था!

इसे फायर फिनिक्स भी कहा जाता है.  यह गहरा सुनहरा होता है पर मादा हल्के भूरा रंग की होती है यह gelliformes की गेम बर्ड्स की श्रेणी में आते है phasianidae के परिवार में आते है. 

इसका binomial name (द्विपद नाम) chrysolophus pictus है. चाइना के अलावा जंगली प्रजाति मैक्सिको, पेरु, अर्जेंटीना, कोलंबिया आदि जगहों पर पायी जाती है. 

एक वयस्क नर की लंबाई 85 से 105 सेंटीमीटर या 35 से 40 इंच तक होती है इसकी पूछ इसकी कुल लंबाई की 2/3 होती है इसकी शिखा सुनहरी वह दुम गहरी चमकदार लाल रंग की होता है. इसके आसपास पंख काले व नारंगी रंग के होते है आंखों को छोड़कर पूरा चेहरा ढक लेते हैं इसका शरीर एक जंग लगे लोहे के रंग का होता है. इसकी मध्य की पूछ को दालचीनी जैसे काले धब्बे होते हैं ऊपर के पंख मध्य के पंखों की तरह ही होते हैं. लाल छाती, निचले पैर व पंजा हल्के पीले होते हैं! 



मादा तीतर अन्य आम तितर की तरह ही हल्की भूरि  होती है यह अन्य मुर्गियों की प्रजातियों के मुकाबले ज्यादा बुरी व पतली होती है. वह अपने आनुपातिक लंबी पूछ होती है. इसकी लंबाई 24 से 31 इंच, 65 से 80 सेंटीमीटर तक होती है इसकी छाती  चमड़े जैसे रंग की होती है वह अपने जीवन काल के बाद नर तितर की तरह इसके पैर हल्के पीले हो जाते हैं! 

ये रातों में पेड़ों पर घूमना पसंद करते हैं ज्यादा ऊंचा उड़ नहिं सकते हैं. सुनहरा तीतर एक बार में 10 से 12 अंडे देता है मैं 20 से 22 दिन तक इनको सेता है. यह जामुन, बीज व अन्य शाकाहारी खाना खाते हैं जंगली तीतर लाल सुनहरा होता है! 

चाइना के अंदर इसे ग्रेड 2 की सुरक्षा प्रदान की गई है क्योंकि इसकी संख्या में बहुत तेजी से कमी आ रही है मनुष्य व जंगली जानवरों के द्वारा शिकार के कारण इनकी संख्या में कमी आती जा रही है. ये प्रजाति अब विलुप्त होने की कगार पर है! 

Different types of birds feet and legs in hindi (पक्षियों के पैर और पंजों के प्रकार )

Birds feet (पक्षियों की पंजों से पहचान)

पैर की उंगलियों की व्यवस्था (toes arrangement) 


(1) anisodactyl - यह पक्षियों में सबसे ज्यादा पाया जाने वाला पैर है, पहली उंगली जिसे हैलक्स कहते हैं पीछे की ओर इशारा करती है और बाकी तीन उंगलियां आगे की ओर इशारा करती हैं, हमारे आस-पास पाए जाने वाले अधिकतर पक्षियों में इस तरह की उंगली वाला पंजा पाया जाता हैं, उदाहरण - कबूतर (pigeon) , गौरैया (sparrow) , jay's, Robin  इत्यादि!



(2) zegodactyl - यह पक्षियों में दूसरा सबसे ज्यादा पाया जाने वाला पंजा है, इसमें दो-दो उंगलियों के जोड़े होते हैं एक जोड़ा आगे की ओर और एक जोड़ा पीछे की ओर होता है, इसमें हैलक्स और 4 digit  के उंगली पीछे की ओर होती है और 3 और 2  digit आगे की ओर, इस प्रकार के पंजे से पेड़ों पर पकड़ बनाने में आसानी होती है, उदाहरण - उल्लू(owl) कठफोड़वा (woodpecker) , तोता (parrot) !


(3) tridactyl - इसमें केवल आगे की ओर तीन उंगलियां पाई जाती हैं, इस प्रकार के पंजे में hallux नहीं पाया जाता, उदाहरण - उत्तर में पाए जाने वाला कठफोड़वा (northern woodpecker), इमस (emus) और बस्टर्ड्स (bustards)!


(4) didactyl - इसमें केवल दो ही उंगलियां (digit) होती हैं, इस प्रकार के पंजे में भी हेलेक्स (hallux) नहीं पाया जाता है, शुतुरमुर्ग एकमात्र ऐसा पक्षी है जिसमें इस तरह का पंजा पाया जाता है!


(5) syndactyl- यह भी anisodactyl की तरह ही होता है पर इसमें 3 व 4 नंबर की (digit) उंगलि आपस में जुड़ी हुई होती हैं वह 2 digit अलग होती है यह coraciiformes की विशेषता होती है, उदाहरण - किंगफिशर (kingfisher) रोलर (roller), बी-ईटर (bee-eater) इत्यादि!



(6) pamprodactyl- इसमें सारी उंगलियां आगे की और होती हैं पर 1 व 4 नंबर की उंगली (digit)पीछे की ओर मुड़ भी सकती है!



(7) heterodactyl - यह भी zegodactyl की तरह होता है, इसमें भी दो-दो उंगलियों के जोड़े होते हैं पर इसमें 1 और 2 (digit) उंगली पीछे की ओर व 3 व 4 नंबर आगे की तरफ होती है, यह केवल tragons में पाया जाता है!



(8) raptorial - इस प्रकार के पंजे में मुड़े हुए धारदार नाखुन होते हैं जिनको Talons कह्ते है
उदाहरण - उल्लू, बाज!





पक्षियों के झिल्लीदार पंजे

(1) palmate - palmate में  2 व 4 नंबर की डिजिट या उंगली आपस में झिल्ली के द्वारा पूरी तरह से जुड़ी हुई होती है, बत्तख, कुल कलहंस, terns आदि में ये खूबी देखी जाती है इससे पानी में अधिक शक्ति लगाने में आसानी होती है जो कि तैरना आसान बनाता है!



(2) semipalmate - इसमें भी palmate की तरह 2 व 4 नंबर की उंगली झिल्ली के द्वारा जुड़ी हुई होती हैं परंतु इसमें झिल्ली बहुत ही कम मात्रा में होती है आधे से भी कम हिस्से में झिल्ली होती है!



(3) totipalmate - इसमें चारों उंगलियां पूरे तरीके से झिल्ली के द्वारा जुड़ी हुई होती हैं, उदाहरण - कोरमोरेंट (cormorant)!



(4) lobate - इसमें झिल्लीदार उँगलियाँ होती है, उदाहरण - greebe !